यह क्या है
3-2-1 रूल एक आसान बैकअप रूटीन है। आप अपनी फ़ोटो की 3 कॉपियाँ रखते हैं, जो 2 अलग-अलग तरह के स्टोरेज पर होती हैं, और 1 कॉपी किसी दूसरी जगह (ऑफ़-साइट) रखी जाती है। ऑफ़-साइट का मतलब आपके घर या स्टूडियो से दूर है। यह रूल आपकी ओरिजिनल इमेज फ़ाइलों और एडिट की गई फ़ाइलों को ड्राइव क्रैश होने, चोरी और गलती से डिलीट होने से बचाता है।
कोई भी बैकअप तरीका सौ फीसदी अचूक नहीं होता। फिर भी, अगर आपकी कॉपियाँ इस तरह से अलग-अलग जगह सुरक्षित हैं, तो किसी एक खराबी से क्लाइंट का शूट या पर्सनल सेशन बर्बाद होने की आशंका बहुत कम हो जाती है।
आपको क्या चाहिए
- कैमरा कार्ड। वह मेमोरी कार्ड जिसमें आपके शूट की नई इमेज फ़ाइलें हैं।
- मेन कंप्यूटर। कंप्यूटर की वह ड्राइव जहाँ आप रोज़ाना एडिटिंग करते हैं और अपनी सबसे अच्छी फ़ोटो चुनते हैं।
- 2 स्टोरेज डिवाइस। कम से कम 2 अलग फिजिकल डिवाइस, जैसे एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव।
- ऑफ़-साइट स्टोरेज। एक क्लाउड सर्विस, या आपके स्टूडियो से दूर कोई दूसरी जगह।
स्टेप बाय स्टेप
- इंपोर्ट करें। कैमरे के कार्ड से इमेज को अपने मेन कंप्यूटर पर कॉपी करें।
- पहली कॉपी। उन्हीं फ़ाइलों को एक लोकल एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव पर कॉपी करें जिसे आप सिर्फ़ बैकअप के लिए इस्तेमाल करते हैं।
- दूसरी कॉपी। उन फ़ाइलों की एक और कॉपी दूसरी ड्राइव या किसी अन्य फिजिकल स्टोरेज डिवाइस पर बनाएं।
- क्लाउड कॉपी। अपनी इमेज को क्लाउड स्टोरेज सर्विस पर अपलोड करें ताकि आपके पास एक ऑफ़-साइट कॉपी हो।
- सिंक में रहें। जैसे-जैसे आप नया काम एडिट करते हैं, अपनी क्लाउड कॉपी और बैकअप ड्राइव को रेगुलर रूप से अपडेट करते रहें।
- ड्राइव को दूसरी जगह ले जाएं। अपनी दूसरी बैकअप ड्राइव को किसी सुरक्षित जगह रखें, जैसे स्टूडियो की सेफ़ या किसी रिश्तेदार का घर, ताकि किसी एक जगह आग लगने या चोरी होने से सारी कॉपियाँ नष्ट न हों।
टिप्स
- कार्ड संभाल कर रखना। अपने कैमरे के कार्ड को तब तक फॉर्मेट (यानी डेटा इरेज़) न करें, जब तक आप यह जांच न लें कि आपकी मेन कॉपी और बैकअप सुरक्षित हैं।
- रेगुलर जांच। बीच-बीच में कुछ आर्काइव की गई फ़ाइलों को खोलकर देखें कि वे करप्ट (यानी खराब और न खुलने वाली) तो नहीं हुई हैं।
- ऑटोमेशन। अपने क्लाउड बैकअप सॉफ़्टवेयर को बैकग्राउंड में अपने-आप चलने के लिए सेट करें ताकि आपकी ऑफ़-साइट कॉपी हमेशा अपडेट रहे।
- ड्राइव बदलना। पुरानी एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव को हर कुछ सालों में बदल दें ताकि उम्र बढ़ने से खराब होने का खतरा कम हो जाए।
- साफ़-साफ़ लेबल लगाएं। हर बैकअप ड्राइव पर तारीख और उस पर मौजूद कंटेंट का मार्क लगाएं ताकि आप फ़ाइलें जल्दी ढूंढ सकें।
